Know your disease from Rashi (राशि से अपनी बीमारी के बारे में जानें)
राशि से अपनी बीमारी के बारे में जानें
हम जानते हैं कि किसी भी जन्म कुंडली में 12 घर
और 12 राशियां होती हैं। कालपुरुष की कुंडली (Natural Zodiac’s
Horoscope) में राशियां अपने मूल क्रम में क्रमशः पहले घर, दूसरे घर,
तीसरे घर आदि से लेकर बारहवें घर तक का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसका आशय यह है कि
कालपुरुष कुंडली में प्रथम घर में मेष (Aries) राशि, दूसरे
घर में वृषभ (Taurus) राशि, तीसरे घर
में मिथुन (Gemini) राशि, चौथे घर
में कर्क (Cancer) राशि, पांचवें
घर में सिंह (Leo) राशि, छठे घर
में कन्या (Virgo) राशि, सातवें
घर में तुला (Libra) राशि, आठवें घर
में वृश्चिक (Scorpio) राशि, नौवें घर
में धनु (Sagittarius) राशि, दसवें घर
में मकर (Capricorn) राशि,
ग्यारहवें घर में कुंभ (Aquarius) राशि और
बारहवें घर में मीन (Pisces) राशि होती है।
ये उपर्युक्त सभी 12 राशियां अपने क्रमानुसार
मनुष्य के शरीर के विभिन्न अंगों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उदाहरण के तौर पर मेष
राशि सिर का, वृषभ राशि चेहरे व गर्दन के ऊपरी भाग का, मिथुन राशि गर्दन के निचले
भाग, कंधों व हाथों और सीने के ऊपरी भाग में स्थित पंसलियों का, कर्क राशि सीने व
पेट का, सिंह राशि दिल, पेट, रीढ़ की हड्डी का, कन्या राशि आंतों का, तुला राशि
किडनी व पेशाब से संबंधित अंगों एवं महिलाओं के प्रजनन अंगों आदि का, वृश्चिक राशि
पुरुष के प्रजनन अंगों व प्रोस्ट्रेट का, धनु राशि नितंबों का, मकर राशि घुटनों
का, कुंभ राशि पिंडलियों का और मीन राशि पैरों व अंगूठों का प्रतिनिधित्व करती है।
आप अपनी कुंडली से बीमारी
का पता ऐसे लगाएंगे – यदि आपकी कुंडली में उपर्युक्त 12 राशियों में से कोई भी
राशि छठे या आठवें या बारहवें घर में स्थित है और उस पर विशेष रूप से शनि (Saturn), राहु (Rahu), केतु (Ketu), मंगल (Mars) जैसे पापी
ग्रहों (malefic planets) अथवा सामान्यतः
पापी ग्रहों की संगत में आ
गए बुध (Mercury) या क्रूर ग्रह सूर्य (Sun) या पक्ष बल की दृष्टि से कमजोर चंद्रमा (Moon) की दृष्टि (नज़र) या युति (साथ में बैठे हों)
हो, तो कालपुरुष कुंडली के अनुसार घरों या भावों का प्रतिनिधित्व करने वाली उस
राशि के अनुरूप शरीर के विशिष्ट अंग में बीमारी होने की संभावना होती है। यह
संभावना तब और प्रबल हो जाती है जब कि आपकी कुंडली में वह घर-विशेष या भाव-विशेष
भी पापी ग्रहों द्वारा पीड़ित हो।
उदाहण के तौर पर, यदि आपकी कुंडली में मेष राशि
किसी भी घर या भाव में पड़ती हो और यदि उस पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो और आपकी
कुंडली का प्रथम घर यानी लग्न भी पापी ग्रहों से प्रभावित हो। साथ ही, प्रथम भाव
का कारक ग्रह सूर्य भी पापी ग्रहों से पीड़ित हो अथवा वह छठे या आठवें या बारहवें
घर में बैठा हो अथवा उपर्युक्त दोनों स्थितियां हों, तो आप यह समझिए कि सिर से
संबंधित माईग्रेन या न्यूरो जैसी कोई गंभीर बीमारी आपके जीवनकाल में अवश्य होगी।
आप ग्रहों की दृष्टि और
युति का पता ऐसे लगाएंगे – वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह अपने से सातवें स्थान यानी 180
डिग्री पर स्थित घर या राशि या ग्रह पर दृष्टि डालता है अर्थात उसे प्रभावित करता
है। यदि अच्छा ग्रह है, तो वह अच्छा प्रभाव डालेगा लेकिन यदि वह बुरा ग्रह है, तो
बुरा प्रभाव डालेगा। लेकिन, कुछ ग्रहों को विशिष्ट दृष्टि की शक्तियां प्राप्त हैं।
शनि सातवें घर के अलावा तीसरे और दसवें घर पर भी दृष्टि डालता है। मंगल सातवें घर
के अलावा चौथे और आठवें घर पर भी दृष्टि डालता है। गुरू (Jupiter) सातवें घर के साथ-साथ पांचवें और नौवें घर भी
दृष्टि डालता है। गुरू के ही समान राहु और केतु भी सातवें के साथ-साथ पांचवें और
नौंवें घर पर दृष्टि डालते हैं।
आप युति का पता ऐसे लगाएं
कि जिस घर या भाव में दो या दो से अधिक ग्रह एक साथ बैठे हों, तो यह माना जाता है
कि वे ग्रह युति में हैं तथा ग्रह और राशि की युति तब होती है जब कि ग्रह उस
राशि-विशेष में बैठा होता है।
इस प्रकार, आप अपनी कुंडली
का अवलोकन करके अपनी चल रही या होने वाली बीमारी के बारे में अनुमान लगा सकते हैं।
बीमारी कब शुरू होगी और कितने दिनों तक रहेगी, इसका पता ग्रहों की दशाओं और ग्रहों
के गोचर की स्थिति से लगाया जा सकता है जिसके बारे में हम आगे किसी और लेख के माध्यम
से चर्चा करेंगे।
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